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India meeting with BRICS nations/भारत ने एक स्वतंत्र क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्थापित करने हेतु ब्रिक्स राष्ट्रों से बैठक


भारत ने एक स्वतंत्र क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्थापित करने हेतु ब्रिक्स राष्ट्रों से बैठक
वर्तमान में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी बाजार में पश्चिमी जगत की तीन कंपनियों स्टैंडर्ड्स एंड पूअर्स (एसएंडपी), मूडीज व फिच का 90 फीसद से ज्यादा कब्जा है। उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्था की रेटिंग पर इन एजेंसियों के आधिपत्य से पड़ने वाले दुष्प्रभावों के समाधान के लिए सबसे पहले भारत ने ही ब्रिक्स की अपनी स्वतंत्र रेटिंग एजेंसी के गठन का प्रस्ताव रखा था।
ब्रिक्स अधिकारियों की बैठक के दौरान न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) का दायरा बढ़ाने
और सभी सदस्य देशों में एनडीबी के तहत परियोजनाओं के समान विस्तारीकरण पर भी चर्चा हुई। गर्ग ने एनडीबी की सदस्यता बढ़ाने के लिए भारत द्वारा लगातार रचनात्मक भागीदारी निभाते रहने पर बल दिया। गौरतलब है कि ब्रिक्स देशों द्वारा गठित एनडीबी का परिचालन वर्ष 2015 में शुरू हुआ। इसका मकसद सदस्य देशों की वित्तीय जरूरतें पूरी करना है।
प्रमुख तथ्य
भारत ने ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी प्रस्ताव पर सर्वसम्मति बनाने में ब्रिक्स सदस्यों के समर्थन की मांग की। ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के तहत स्थापित विशेषज्ञ समूह द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को आगे बढ़ाने का भी अनुरोध किया गया। भारत ने पहली बार ब्रिक्स ग्रुपिंग के लिए इस तरह की एजेंसी रखने का विचार किया था वर्तमान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी बाजार द्वारा उत्पन्न उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं के लिए बाधाओं को हल करने के लिए एस एंड पी, मूडीज और फिच पर निर्भर है। इन तीन पश्चिमी रेटिंग एजेंसियों के पास 90% से अधिक का रेटिंग बाजार हैं।
अन्य मुद्दों पर चर्चा
बैठक के दौरान सदस्य देशों में समान रूप से नए विकास बैंक (New Development Bank) की पाइपलाइनों परियोजना को बढ़ाने, एनडीबी की सदस्यता के विस्तार पर चर्चा की। इस बैठक के दौरान सार्वजनिक निजी भागीदारी पर अवैध वित्तीय प्रवाह और ब्रिक्स टास्क फोर्स पर कार्यकारी समूह की स्थापना के लिए दक्षिण अफ़्रीकी प्रेसीडेंसी के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया।

वर्तमान में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी बाजार में पश्चिमी जगत की तीन कंपनियों स्टैंडर्ड्स एंड पूअर्स (एसएंडपी), मूडीज व फिच का 90 फीसद से ज्यादा कब्जा है। उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्था की रेटिंग पर इन एजेंसियों के आधिपत्य से पड़ने वाले दुष्प्रभावों के समाधान के लिए सबसे पहले भारत ने ही ब्रिक्स की अपनी स्वतंत्र रेटिंग एजेंसी के गठन का प्रस्ताव रखा था।

ब्रिक्स अधिकारियों की बैठक के दौरान न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) का दायरा बढ़ाने और सभी सदस्य देशों में एनडीबी के तहत परियोजनाओं के समान विस्तारीकरण पर भी चर्चा हुई। गर्ग ने एनडीबी की सदस्यता बढ़ाने के लिए भारत द्वारा लगातार रचनात्मक भागीदारी निभाते रहने पर बल दिया। गौरतलब है कि ब्रिक्स देशों द्वारा गठित एनडीबी का परिचालन वर्ष 2015 में शुरू हुआ। इसका मकसद सदस्य देशों की वित्तीय जरूरतें पूरी करना है।